देश भगत विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज एंड लैंग्वेजेस तथा फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
April 22, 2026 2026-04-22 9:40देश भगत विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज एंड लैंग्वेजेस तथा फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
देश भगत विश्वविद्यालय में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक विशेष एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम फैकल्टी ऑफ सोशल साइंसेज एंड लैंग्वेजेस तथा फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
मंडी गोबिंदगढ़, 21 अप्रैल 2026
एक्सटेंशन लेक्चर का विषय था— “डॉ. बी.आर. अंबेडकर: संविधान निर्माण एवं सामाजिक न्याय। यह आयोजन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. जोरा सिंह एवं उप-कुलाधिपति डॉ. तेजिंदर कौर की प्रेरणा से संपन्न हुआ, जिसमें उप-कुलपति, वरिष्ठ प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डीबीयू गान एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। सोशल साइंसेज एंड लैंग्वेज संकाय की प्रभारी डॉ. रेनू शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया।इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के संवैधानिक दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

मुख्य वक्ता फैकल्टी ऑफ लीगल स्टडीज के प्रिंसिपल डॉ. जयवीर सिंह ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 17 और 46 सामाजिक लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संविधान को केवल पाठ्यपुस्तक न मानकर अपने जीवन का संकल्प बनाएं।

कार्यक्रम संयोजक, हिंदी विभागाध्यक्ष एवं दलित चिंतक प्रो. डॉ. अजय पाल सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भाषा को सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम माना। उन्होंने कहा कि ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। सिंह ने कहा कि सामाजिक समरसता और शिक्षा के माध्यम से ही राष्ट्र को प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रोफेसर धर्मेंद्र सिंह ने सामाजिक न्याय में महिलाओं एवं वंचित वर्गों की भागीदारी को आवश्यक बताते हुए कहा कि अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से इस दिशा में दूरदर्शी पहल की थी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उप-कुलपति प्रो. डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि संस्थाएं तटस्थ नहीं होतीं, बल्कि उन्हें समावेशी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। यही वास्तविक संस्थागत निर्माण है, जिसकी परिकल्पना डॉ. अंबेडकर ने की थी। विद्यार्थियों को संविधान की प्रस्तावना सिर्फ याद नहीं करनी, उसे जीना है। सामाजिक विज्ञान की भूमिका यहीं से शुरू होती है कि हम भेदभाव की जड़ों को समझें और खत्म करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अंबेडकर के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।




कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवनिंदर कौर ग्रेवाल एवं डॉ. अजय पाल सिंह ने किया। अंत में प्रो. राम सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया तथा विद्यार्थियों से अंबेडकर के साहित्य के अध्ययन और संविधान के मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।